पटना (बिहार) : बिहार मे चुनाव प्रचार थमने के साथ ही बिहार सरकार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर एक बयान साझा किया है। साझा किए गए बयान मे उन्होंने इशारों ही इशारों मे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का नाम लिए बगैर निशाना साधते हुए गंभीर आरोप लगाया है। तेजस्वी यादव के इस बयान के बाद चुनाव प्रक्रिया के निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे है?

तेजस्वी यादव ने रविवार को कहा है कि प्रथम चरण के बाद एनडीए (𝐍𝐃𝐀)खेमे में भारी गमगीन माहौल है। हार के ख़ौफ़ से गृहमंत्री अधिकारियों से मिलकर एवं फ़ोन पर धमकी दे रहे है। जहां ठहरते है उस होटल के सीसीटीवी (𝐂𝐂𝐓𝐕)बंद करा देर रात्रि अधिकारियों को बुलाते है।
अभी सीएम (𝐂𝐌)आवास से बिना मुख्यमंत्री की जानकारी के भूंजा पार्टी की मित्र मंडली के ईडी (𝐄𝐃) के चंगुल में फंसे महाभ्रष्ट अधिकारी फ़ोन कर अधिकारियों को महागठबंधन के कार्यकर्ताओं को पुलिस के द्वारा वोटिंग के दिन तक डिटेन करने, महागठबंधन समर्थित मजबूत बूथों को डिस्टर्ब करने संबंधित निर्देश दिए जा रहे है। संबंधित रेंज के अधिकारी बैठक कर रहे है।

बदलाव निश्चित है इसलिए अधिकारी फ़ोन करने वाले का स्क्रीनशॉट तक हमें भेज रहे है। बिहार सरकार के ईमानदार अधिकारी बिना रिटायर्ड अधिकारियों के दबाव में आए संविधान सम्मत अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें।
दो गुजराती येनकेन प्रकारेण बिहार पर कब्जा करना चाहते है। वो बिहार को अपना उपनिवेश बनाना चाहते है। बिहार की जनता संविधान विरोधी कार्य करने वाले बेगैरत बे-ज़मीर सत्ताधारी नेताओं को कड़ा सबक सिखाने के लिए एक पैर पर खड़ी है। गणतंत्र की जननी बिहार में इनकी वोट चोरी हरगिज नहीं चलेगी। जनता हर प्रकार से यानि हर प्रकार से इनकी वोट चोरी और लोकतंत्र की डकैती रोकने के लिए तैयार है।
