वैशाली (बिहार) : यहाँ की जिलाधिकारी वर्षा सिंह के मार्गदर्शन में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। “सात निश्चय–3” के अंतर्गत दोगुना रोजगार–दोगुनी आय के लक्ष्य को साकार करते हुए जीविका दीदियों ने आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों के लिए ड्रेस सिलाई की जिम्मेदारी उठाई है।

जिले में संचालित संकुल संघ स्तर पर सिलाई कार्य का संचालन किया जा रहा है, जिससे जीविका दीदियों को अपने ही क्षेत्र में रोजगार का अवसर मिल रहा है और उनकी आमदनी में वृद्धि हो रही है। वर्तमान में जिले के सभी प्रखंडों में कुल 34 संकुल संघों के माध्यम से सिलाई कार्य किया जा रहा है, जहाँ लगभग 800 जीविका दीदियाँ सक्रिय रूप से कार्यरत हैं।

आंगनबाड़ी केंद्रों के 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के लिए दो सेट ड्रेस तैयार करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। वैशाली जिले में कुल 1,45,037 बच्चों के लिए ड्रेस तैयार किया जाना है। अब तक 18,719 बच्चों का ड्रेस तैयार कर लिया गया है, जिससे कार्य में निरंतर प्रगति परिलक्षित हो रही है।
इसी क्रम में जीविका की जिला परियोजना प्रबंधक, वंदना कुमारी द्वारा प्रखंड राजापाकर स्थित शक्ति संकुल स्तरीय संघ तथा बिदुपुर स्थित वैशाली संकुल संघ में चल रहे सिलाई कार्यों का निरीक्षण किया गया। राजापाकर में 20 तथा बिदुपुर में 22 दीदियाँ सिलाई कार्य में संलग्न पाई गईं। निरीक्षण के दौरान कार्य की गुणवत्ता एवं समयबद्धता पर विशेष बल दिया गया।
जिला पदाधिकारी वर्षा सिंह ने कहा कि यह पहल महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने निर्देश दिया कि अधिक से अधिक इच्छुक जीविका दीदियाँ अपने-अपने प्रखंड स्थित संकुल संघ कार्यालय में आवेदन देकर इस सिलाई कार्य से जुड़ें, ताकि उन्हें स्थायी आय का स्रोत मिल सके और परिवार की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हो।

महिला रोजगार को बढ़ावा देने की यह पहल न केवल बच्चों को गुणवत्तापूर्ण ड्रेस उपलब्ध करा रही है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी सशक्त माध्यम सिद्ध हो रही है। उक्त आशय की जानकारी सोमवार को जिला सूचना एवं जनसंपर्क कार्यालय के द्वारा दी गई है।
