मधुबनी: न्यायालय ने फुलाबाबू हत्याकांड में दोषी पाए पिता~ पुत्र समेत सात लोगो को सुनाया आजीवन कारावास की सजा और दस ~ दस हजार रूपए जुर्माना

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स्थानीय संवाददाता ,मधुबनी (बिहार): व्यवहार न्यायालय में फुलबाबू हत्याकांड की सुनवाई बुधवार को पूरी कर ली गई । इस हत्याकांड की सुनवाई पूरी होने में करीब 16 वर्ष का समय बीतने के साथ ही मृतक के परिजनों को इंसाफ मिला तो दोषी करार दिए गए बाप बेटे सहित सात लोगों को माननीय व्यवहार न्यायालय ने उम्रकैद की सजा सुनाई है साथ ही साथ दस दस हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया है । माननीय न्यायालय ने बुधवार को सजा की बिंदुओ पर दोनों पक्षों के अधिवक्ता की दलीलें सुनने के बाद माननीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मंजूर आलम की अदालत ने सभी सातों आरोपियों को भादवि की धारा 302 के तहत दोषी मानते हुए आजीवन कारवास और अर्थदंड का फैसला सुनाया। कोर्ट ने सभी लोगों को दस-दस हजार रुपए जुर्माना भी लगाया है।

बहस के दौरान अभियोजन की ओर से स्पेशल पीपी कुमारी मधु रानी ने दोषी लोगों को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की थी। उन्होंने बताया कि मधवापुर थाना क्षेत्र के बैरवा गांव निवासी अब्दुल लतीफ, शकील रैन, मो. सिकंदर, मो. मंजर, फिरोज, मो. मुन्ना एवं मो. अख्तर को न्यायालय ने उम्रकैद की सजा सुनाई है।

यहां बताते चलें कि 15 मई 2007 को फुलबाबू अपने घर के निकट मजदूर की सहायता से गड्ढा खोद रहे थे । इसी क्रम में आरोपितो ने वहां पहुंचकर फुलबाबू पर जानलेवा हमला कर दिया था । धारदार हथियार से गर्दन कटने के बाद इलाज के लिए डीएमसीएच में भर्ती कराया गया था , जहां इलाज के क्रम में उसकी मौत हो गई थी ।

पुलिस ने मामला पंजीकृत कर अनुसंधान शुरू की और न्यायालय में आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र समर्पित की थी । पुलिसिया पड़ताल और न्यायालय के फैसले में 16 वर्ष का समय बिता तो परिजनों को इंसाफ भी मिला स्पेशल पीपी ने बताया कि 15 मई 2007 को फूलबाबू अपने घर की मरम्मत करा रहे थे। मजदूर की सहायता से गड्ढा खोद रहे थे तभी आरोपितों ने लाठी डंडे कुदाल से हमले कर दिए। गर्दन कट जाने के कारण वह गंभीर रूप से जख्मी हो गया। डीएमसीएच में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

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